इटली का एकीकरण कब और किसने किया

 

इटली का एकीकरण

इस आर्टिकल में  इटली के एकीकरण की बात करेंगे  क्यों इटली के एकीकरण की जरूरत पड़ी,  इटली के एकीकरण के क्या क्या कारण थे।

एकीकरण का अर्थ क्या है

सबसे पहले तो  एकीकरण का अर्थ पता होना चाहिए।

एकीकरण का अर्थ है  सभी प्रांतों का एक होना,  जैसे जर्मनी,   जर्मनी देश  बहुत  सारे प्रदेशों को मिलाकर बना है, जर्मनी की एक भाषा है, एक राष्ट्रीय चिन्ह है।  दुनिया में ऐसे बहुत से देश है ,जो अलग-अलग प्रांतों में  बांटे है लेकिन वे एकीकृत राज्य हैं,उनके राष्ट्र की भाषा है, एक राष्ट्रीय चिन्ह है, एक  राष्ट्रीय गान है।

इटली के एकीकरण की जरूरत  क्यों पड़ी।

इटली भी अलग-अलग प्रांतों में बटा था,   वहा के लोग अलग-अलग भाषा बोलते थे, अलग संस्कृति  लेकिन वे एक  राष्ट्र के रूप में  एकीकृत नहीं थे।

फ्रांस में जब  नेपोलियन का उदय हुआ था उसने  1804 से लेकर 1815 तक  इटली के कई राज्य जीत लिए, नेपोलियन ने इटली से  खूब धन और मूर्तियां  छीन कर  फ्रांस ले गया, नेपोलियन की युद्ध के कारण ही  इटली के लोगों को ऐसा लगा उन्हे  अपने राष्ट्र को  एक संगठित राज्य बनाना चाहिए।  इटली के   उदार वादियों ने  कई बार  इटली के  एकीकरण के लिए  आवाज उठाई।

वियना  कांग्रेस के बाद  इटली की स्थिति

1815 मे  नेपोलियन बोनापार्ट को  वाटरलू के युद्ध में  बंदी बनाकर हेलेना दीप में  कैद कर दिया।

1815 में  यूरोप में शांति व्यवस्था  बनाने के लिए  ऑस्ट्रिया की राजधानी में वियना में  सम्मेलन  बुला गया।

  नेपोलियन ने इटली के  राज्य  बहुत से राज्य जीते थे।

वियना  कांग्रेस के सदस्यों ने   इटली की  जन इच्छा और  राष्ट्रीय  अवहेलना कर  राज्य को पुनरुद्धार किया गया।

1 उत्तर में  स्थित  लॉन्बार्डी ओर  वेनेशिया के  प्रदेश ऑस्ट्रिया के अधीन कर दिए गए।

2 मध्य इटली में  पोप शासन को लागू कर दिया गया ।

3  दक्षिण भाग में इटली के बुर्बो वंश का  शासन था।

इस प्रकार वियना कांग्रेस ने  इटली को तीन भागों में विभाजित कर दिया।  और इन प्रदेशों में  अलग-अलग शासक को नियुक्त कर दिया।  इस प्रकार एक राष्ट्र को  विभाजित कर दिया गया।  यह व्यवस्था  इटली के  राष्ट्रीयता के अनुकूल नहीं थी और इतनी के लोगों को भी पसंद नहीं थी,  इटली के लोग  एक राष्ट्र का निर्माण करना चाहते थे,  लेकिन उनके सामने तीन समस्याएं थी

1  इटली को   शास्त्रीय के प्रभाव से मुक्त कराना।

2  देश के शासन को  लोकतंत्र के अनुकूल बनाना।

3 राष्ट्रीय एकता स्थापित करना।

इन समस्याओं को दूर करने के लिए इटली के लोगों ने  कई गुप्त समितियां बनाई  जैसे काबारोनी  दल  का गठन।  यह दल  पूरे इटली में  छा गया इसका उद्देश्य इटली के नवयुवक को राष्ट्र के प्रति जागरूक कराना था।

इटली के एकीकरण में  कुछ महत्वपूर्ण लोगों ने योगदान दिया है।

मेजिनी

इटली के एकीकरण का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।  इनका जन्म 1805 में जिनेवा में हुआ।  इनका   लगाव  साहित्य की ओर  ज्यादा था  लेकिन यह  देश प्रेम की भावना से भी  प्रेरित थे। ये  फ्रांस की क्रांति से भी  बहुत प्रभावित थे।

पढ़ाई करने  समाप्त करने के बाद मेजिनी  कार्बोनरी   दल के सदस्य बन गए।  1830 में  उदार विचारों के कारण उसे  गिरफ्तार कर लिया गया।  जेल से बाहर आने के बाद  मेटरनिख ने  युवक  इटली  नामक संस्था बनाई। 1833 में  युवा इटली की  संख्या  साठी हजार से ऊपर हो गई।  वह देश की व्यवस्था से  खुश नहीं था  और उसमें सुधार लाने का  प्रयास कर रहा था।  उसने देश की जनता को कहा था  कि हमारी  राष्ट्र की  शानदार प्राचीन परंपरा रही है लेकिन वर्तमान समय में राष्ट्र का कोई भी अस्तित्व नहीं है। इसका दोषी उसने  ऑस्ट्रिया को बताया। इस प्रकार उसने लोगों को  स्वतंत्रता का पाठ पढ़ाया और आस्ट्रिया के  खिलाफ संगठित होकर लड़ने  को कहा।  इटली फ्रांस की क्रांति 1830 और 1848  से बहुत प्रभावित हुआ था।  1833 में मेजिनी को फिर से जेल को हवा खानी पड़ी।  एक बार तो  इन्हें अपने देश से भागना पड़ा।

मैजिनी   इटली के एकीकरण में  लोगों को एकजुट लोगों  को  एकजुट करने में सफल रहा।

 

इटली के एकीकरण में   कैवूर की भूमिका

कैवुर  का  जन्म  1810 में  जमीदार परिवार में हुआ था।  कैवूर का पूरा नाम  काउंट कैमिलो  डी कैबुर  था।

शुरुआत में कैबुर  सैनिके थे।  यह वैद्य  राजसत्ता के समर्थक थे  इंग्लैंड की संसद प्रणाली से बहुत प्रभावित थे।  1848 में  देश के  सांसद बन गए , 1852 में  अपनी योग्यता के अनुसार  पिंड मांड  के प्रधानमंत्री बन गए ।  प्रधानमंत्री रहते हुए  उन्होंने  इटली के एकीकरण में  बहुत ध्यान दिया।

कैबूर की गृह नीति

उनकी मान्यता थी कि  जब तक राज्य  मजबूत नहीं होगा तब तक वह अपनी संघर्षों की सफलता  नहीं प्राप्त कर सकता। उसने व्यापार को खुला छोड़ दो  की नीति अपनाई।  शिक्षा कानून और सेना में  सुधार किए।  उसके कार्य के कारण ही  पीडमार्ट   सशक्त राज्य   बन सका।   उसके नेतृत्व में ही   इटली का एकीकरण  का कार्य शुरू हुआ ।

उसने अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए  विदेशी सहायता लेना उचित समझा।  वह इटली कों   ऑस्ट्रिया के प्रभाव से कराना चाहता था ।  क्योंकि  इसके बिना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकता था।  उसे सब पता था कि यूरोप में  सिर्फ एक ऐसी सकती है जो  ऑस्ट्रिया  के खिलाफ है।

उस ने फ्रांस को खुश करने का प्रयास किया  इसके लिए उसने  क्रीमिया की युद्ध में फ्रांस की मदद की।

1856 में  पेरिस संधि में  विचार विमर्श के लिए  सम्मेलन किया गया इसमें  कैवूर भी शामिल हुआ।  उसने इतनी के स्वाधीनता को  प्रस्तुत किया  और इटली की  दयनीय दशा  का कारण  ऑस्ट्रिया को माना।  उसके भाषण से फ्रांस  नेपोलियन3  काफी  प्रभावित हुआ।  उसने इटली को  सैनिक सहायता  देने की मदद की  लेकिन इसमें उसका  निजी लाभ था।  18 58 को  दोनों के बीच प्लंबियास में  एक समझौता हुआ ।

समझौते के अनुसार

ऑस्ट्रिया को  इटली से बाहर निकालने के लिए  फ्रांस इटली को सैनिक सहायता  देगा   और इस सहायता के बदले  इटली फ्रांस को  नीस और सेवाय  प्रदेश  देगा।

  कैवुर का  ऑस्ट्रिया से  युद्ध

फ्रांस की सहायता पाकर  कैवूर ने  ऑस्ट्रिया को   युद्ध के लिए तत्पर  तो कर दिया।   लंबाडी और वेनेशिया के नेतृत्व में   ऑस्ट्रिया के खिलाफ  विद्रोह शुरू हो गया।

युद्ध जारी था  लेकिन फ्रांस ने  खुद को अलग कर लिया।

उसे इटली का एकीकरण   खटक ने  लगा था।

ऐसी स्थिति में ऑस्ट्रिया और इटली के बीच संधि हुई  जिसे   ज़्यूरिग  संधि के नाम से जाना जाता है। 

लॉन्बार्डी का प्रदेश पीडमाँट  को दे दिया गया।

वेनेशिया प्रदेश को  आस्ट्रिया के  प्रभाव में  रखा गया।

निस और सेवाय    प्रदेश  फ्रांस को दे दिए गए।

लेकिन इस संधि से  इटली खुश नहीं था   क्योंकि   आस्ट्रिया का प्रभाव इटली के एक प्रदेश पर  वेनेशिया पर था।

इस प्रकार इटली  एकीकरण का प्रथम चरण  पूरा हो गया।

मध्य इटली का एकीकरण

इटली के  एकीकरण का प्रथम चरण खत्म होने के बाद अब मध्य इटली में एकीकरण का  जोर पकड़ने लगा। मध्य इटली के राज्य में भी अब विद pidmand के साथ  मिलने का प्रयास करने लगे।1860 में मोडना , परमा, टस्कनी  आदि मध्य इटली के राज्य ने  जनमत करके  मध्य इटली में शामिल होने का फैसला किया। इस प्रकार मध्य इटली का पूर्ण एकीकरण तो हो गया अब  दक्षिणी इटली का एकीकरण  बाकी था।  दक्षिणी इटली के एकीकरण में  विदेशी सहायता प्राप्त नहीं हुई है।  इस एकीकरण का प्रमुख नेता गैरीबाल्डी था।

विक्टर इमेनुएल 2

Pidmand का यह  शासक  यूरोपीय शासकों से बहुत दिन था। ये  लोकतंत्र का समर्थन करता था और  उदारवादी विचारों का था।  इन्होंने के एकीकरण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।

गैरीबाल्डी का परिचय

गैरीबाल्डी ने इटली के एकीकरण में  अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।  शुरुआत में गैरीबाल्डी और कैवूर के बीच अच्छे संबंध थे।  धीरे-धीरे  कैवूर को  गैरीबाल्डी पर शक होने लगा। कि वह  दक्षिणी दिल्ली में  गणतंत्र  शासन व्यवस्था ना लागू कर दे।  इसके बाद दोनों में मतभेद हो गए और दोनों अलग-अलग हो गए। 

गैरीबाल्डी  का  जन्म  1807 में  नीस में  हुआ।  गैरीबाल्डी ने नौ सैनिक शिक्षा प्राप्त की थी। वह समुद्री व्यापार करता था और मेजिनी काफी प्रभावित था।  सरकार गैरीबाल्डी के  उदार विचारों से काफी परेशान थी  इसलिए गैरीबाल्डी को कई देश बार छोड़कर भागना पड़ा।  1848 में वह  अमेरिका से इटली वापस आया  लेकिन इसमें  क्रांति में असफलता प्राप्त हुई दक्षिण अमेरिका  भागना पड़ा।  कुछ  गैरीबाल्डी  खूब ज्यादा धन कमाकर  अपने देश इटली वापस आ गया।उसने कैवुर और   विक्टर एमेनुआल  से  संपर्क बनाया।

गैरीबाल्डी  ने लाल कुर्ती  दल का संगठन किया।

सिसली और नेपल्स पर 

इन दोनों राज्यों को राष्ट्रीय धारा से  जोड़ने का कार्य  गैरीबाल्डी ने किया और इन दोनों राज्यों में बुर्बो राजवंश का  शासन था।  गैरीबाल्डी के नेतृत्व में जनता ने  विद्रोह कर दिया।1860 में  गैरीबाल्डी ने सिसली में  अधिकार कर लिया।  इसके बाद ही सीधे  गैरीबाल्डी में नेपल्स पर भी  अधिकार कर लिया।   नेपल्स का शासक  फ्रांसीसी 2  देश छोड़कर भाग गया।  इन दोनों राज्यों को अब pidmand में  शामिल कर लिया गया।

1861 में  सांसद की बैठक में   विक्टर इमेनुएल को  इटली का शासक बनाया गया। 6 जून 1862 को  कैवूर की मृत्यु हो गई।  उसकी इच्छा थी कि  इटली की राजधानी रोम बने।  लेकिन यह कार्य  अभी तक अधूरा था। 

रोम की  प्राप्ति

इटली के एकीकरण में रोम का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।  इटली  अपनी राजधानी बनाना चाहता था  लेकिन उस पर पॉप का अधिकार था। 1870 में  फ्रांस और प्रशा के  बीच में युद्ध छिड़ गया।  इस स्थिति में फ्रांस को रोम से अपने सैनिक  वापस बुलाने पड़े।  इस स्थिति में  इटली ने रोम पर आक्रमण कर दिया। 1870 में  इटली का  रोम पर अधिकार स्थापित हो गया।

इस प्रकार इटली के लोगों की  अंतिम इच्छा भी पूरी हो गई। 

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