सन यात- सेन कौन थे सन यात- सेन के तीन सिद्धांत क्या थे

सन यात- सेन  जन्म से ही क्रांतिकारी थे, उन्होंने मंचू सरकार को हटाकर चीन में  गणतंत्र की स्थापना की थी और भी लोकतंत्र के समर्थक थे, यह बात भी सकती है कि सन यात- सेन  की राजनीतिक विचारधारा रूस के साम्यवादी दर्शन से बहुत अधिक प्रभावित थी उन्होंने अपने देश में साम्यवादी ढंग से परिवर्तन लाने का प्रयास किया वे साम्यवादी दर्शन की  अंधभक्त  नहीं थी। अच्छी तरीके से  जानते थे कि रूस श्रमिकों का देश है और उनका देश चीन किसानों का इसलिए उन्होंने अपनी राजनीतिक विचारों को अपने देश की परिस्थितियों के अनुकूल बनाया।

सन यात-सेन जन्म परिचय

सन यात- सेन को आधुनिक चीन का निर्माता माना जाता है। आधुनिक चीन के निर्माता  डॉक्टर सन यात- सेन  का जन्म 12 नंबर 1866 को  चाइना में हुआ था।

सन यात- सेन  की   कॉलेज की पढ़ाई  हॉन्ग कोंग यूनिवर्सिटी से हुई थी। सन यात- सेन  को कुओमिंतांग  दल के प्रमुख नेताओं में से एक थे। सन यात- सेन  की  1925 ईस्वी में बीजिंग में मृत्यु हो गई थी। इनकी मृत्यु के समय ऐसा लग रहा था कि उनके द्वारा क्रांति के प्रति किए गए प्रयास सभी असफल हो गए हैं परंतु सिंह जी उनके विचारों ने सफलता प्राप्त की। आज चीन का प्रत्येक राजनीतिक दल अपने को सन यात- सेन  का  सच्चा अनुयाई मानता है। चीन की विशाल बड़े भूभाग पर मार्शल च्यांग काई सेक ने अनेक वर्षों तक डॉक्टर सन यात- सेन   के नाम पर इस प्रकार राज्य किया  इस प्रकार खलीफा मोहम्मद उमर ने पैगंबर मुहम्मद के नाम पर राज्य किया। इतना ही नहीं चीन की साम्यवादी नेता  माओ त्से तुंग ने भी  अपनी सफलता के लिए सन यात- सेन  के हम का प्रयोग किया।

सन यात- सेन के तीन सिद्धांत

डॉक्टर सन यात- सेनnने अपने क्रांतिकारी जीवन  के प्रारंभ में ही अपनी राजनीतिक विचारों को 3 सिद्धांतों के रूप में रख दिया था यह सिद्धांत निम्नलिखित थे।

1  राष्ट्रीयता

सन यात- सेन  का  पहला सिद्धांत राष्ट्रीयता था। चीन में सदियों से जहां एक और सांस्कृतिक एकता तो मौजूद थी वहीं दूसरी ओर राजनीतिक एकता का पूर्ण अभाव था यह अभाव बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में  भी था। जनता में स्थानीय तथा प्रांतीय भावनाएं शक्तिशाली थी, कारण था कि विदेशी साम्राज्यवादी शक्तियां चीन में अपना प्रभाव स्थापित करने में सफल हो रही थी। सन यात- सेन  ने इस अभाव का अनुभव करके देश में राष्ट्रीयता का बिगुल बजा दिया एकता के सूत्र में बांधने का प्रयास  किया। सन यात- सेन   के विचारों के अनुसार  साथी एकीकरण का अर्थ  देश को विदेशी साम्राज्यवाद के अभाव से छुटकारा  दिलाना, अपनी जातियों को विभिन्न विचारों को मिलाकर देश प्रेम तथा राष्ट्र हित की भावना जागृत करना, जनता के हृदय में मजबूती से जमी हुई स्थानीय तथा प्रांतीय भावना को समाप्त कर दी राष्ट्र उत्थान के विषय में विचार करने के लिए सहमत करना।

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2  राजनीतिक लोकतंत्र

सन यात- सेन दूसरा सिद्धांत राजनीतिक लोकतंत्र था।

सन यात- सेन लोकतंत्र के पक्के समर्थक थे। इसी कारण उन्होंने चीन में सदियों से चले आ रहे मंचू  राजवंश  को समाप्त करके  राजवंश की प्राचीन परंपरा को समाप्त कर दिया था। उनका जनता की शक्ति में विश्वास था यही कारण था कि वे लोकतंत्र के समर्थक थे, उन्होंने अपना अधिकांश जीवन यीशु के गणतंत्र वातावरण में व्यतीत किया था और स्वयं वहां की विकास को देखा था। यही कारण था कि उन्होंने चीन में क्रांति करके गणतंत्र की स्थापना को अपने जीवन का पवित्र लक्ष्य बना लिया था। 1924 में लोकतंत्र की विषय में उनके विचार बहुत अधिक मजबूत हो गए थे। विचार था सफल लोकतंत्र में सरकार की शासन प्रणाली, कानून, कार्य, न्याय तथा नियंत्रण के 5 शक्ति  विधान पर आधारित होनी चाहिए।

लोकतंत्र को सफलता की अंतिम चोटी पर पहुंचाने के लिए सन यात- सेन   ने तीन बातों पर विशेष बल दिया सबसे पहले देश में सैनिक शक्ति के प्रभुत्व की स्थापना करके देश में पूरे शांति तथा  व्यवस्था स्थापित की जाए। इसके बाद देश में राजनैतिक चेतना का प्रचार प्रसार किया जाए और अंत में वैधानिक तथा लोकतांत्रिक सरकार का करके देश अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सके।

 

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जनता की आजीविका

सन यात- सेन का तीसरा सिद्धांत जनता की आजीविका था। मानव जीवन में भोजन की भारी आवश्यकता का अच्छी तरीके से  उन्होंने और यही कारण था कि उन्होंने अनुभव कर लिया था और यही कारण था कि उन्होंने कृषक वर्ग के उत्थान की ओर अधिक ध्यान दिया।  माता की भूमि उसकी है जो उसे जोतता है। समाज के अन्य वर्गों की जीविका के प्रश्न का समाधान में सामाजिक विकास के साथ करना चाहते थे। वे साम्यवादी के समान भूमि के समान वितरण के सिद्धांत के पक्ष में थे। इस समय उनकी नीति एक प्रबल साम्यवादी की ना होकर एक समाज सुधारक की नीति थी परंतु वह मार्क्स की भौतिकवाद का विरोध करते थे और अच्छी तरीके से अनुभव करते थे कि मार्क्स के सिद्धांतों को चीन में लागू नहीं किया जा सकता।

सन यात- सेन  गीत में सिद्धांतों पर विचार करने के बाद यह स्पष्ट होता है कि डॉक्टर सन यात- सेन   के सिद्धांत मार्क्स से बिल्कुल भिन्न थे। सन यात- सेन  राष्ट्रीय लोकतंत्र और जनता की आजीविका के सिद्धांतों में मार्क्स के वर्ग संघर्ष का कोई स्थान नहीं है और ना ही इन सिद्धांतों में मार्क्स की समाजवादी अर्थ तंत्र की स्थापना के लिए कोई विशेष बल दिया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि सन यात- सेन  ना तो मार्क्स के शुद्ध समाजवादी विचारधारा के समर्थक थे और ना ही साम्यवादी नीति का अनुसरण करने वाले थे। इस प्रकार सन यात- सेन  को साम्यवाद का कट्टर समर्थक नहीं कहा जा सकता है।

सन यात- सेन  का  मूल्यांकन

सन यात- सेन को अपने जीवन में सफलताओं की अपेक्षा असफलताओं का अधिक सामना करना पड़ा फिर भी  उनके महान कार्यों को नहीं भुलाया जा सकता है वास्तव में सन यात- सेन  के चीन के लिए वही किया जो जर्मनी के एकीकरण के लिए बिस्मार्क ने और इटली के एकीकरण के लिए कैवूर और मैजिनी ने, रूस के लिए भी ले लेना और अमेरिका के लिए जॉर्ज वाशिंगटन ने किया था। वे चीन के राष्ट्रपति तथा आधुनिक चीन के निर्माता और विश्व के महान

क्रांतिकारी थे।

 

FAQ
सन यात सेन कौन थे?
आधुनिक चीन के निर्माता और राष्ट्रपति
सन यात सेन के तीन सिद्धांत क्या थे?
राष्ट्रीयता, लोकतंत्र, तथा जनता की आजीविका।
कुओमिंतांग दल की  स्थापना किसने की थी?
सन यात सेन ।
सन यात सेन की  मृत्यु कब हुई थी?
1925।

 

 

सन यात सेन के तीन सिद्धांत
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